तुमने जिससे घृणा किया, वह व्यक्ति किंचित घृणित नहीं,
जिसे देख पसीजा था मन तेरा, वो घायल इंसा हीं पीड़ित नहीं|
यह मानवता की है अजब लड़ाई, लिए कटारें खड़े हैं दो भाई,
दूर खड़ा मन है आतंकित, कब कौन गिरे है किस बताई|
धूं धूं कर के जो जल रहा है, ये मेरा घर भी कल तेरा रहा है,
वो दूर खड़ा हँस रहा है हमपर, उसने भी है क्या ये आग लगाई|
कब कौन गलत है किसे पता, कोई पूछे तो शायद पता चले,
पत्थर और गोली जब दोनों हीं बंद हों, तब कहीं जाकर हवा चले|
तुम थम के देखो ज़रा दो पल तो, रुक के सोचो ज़रा दो पल को,
समय गलत हो, कृत्य गलत हो, पर इंसा शायद गलत नहीं|
Whats happening currently is wrong. Without taking sides, its men falling on both sides. Men who bleed, men who hurt. Men who love their mothers and men who love their Country. This madness has to stop.
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